khesari lal yadav life story in hindi | खेसारी लाल पहले क्या करते थे जाने

khesari lal yadav life story in hindi | खेसारी लाल पहले क्या करते थे जाने खेसारी लाल यादव एक भारतीय अभिनेता, गायक, नर्तक और मॉडल हैं जो मुख्य रूप से भोजपुरी सिनेमा में काम कर रहे हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1986 को बिहार के अकबरपुर में हुआ था। उनके पिता चने बेचकर और गार्ड की नौकरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। खेसारी लाल यादव का बचपन छपरा, बिहार में गुजरा।

khesari lal yadav life story in hindi

खेसारी लाल यादव बचपन से ही गायन और अभिनय में रुचि रखते थे। उन्होंने 1998 में अपने संगीत करियर की शुरुआत की और 2001 में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। उनके पहले भोजपुरी एल्बम “माल भेटाई मेला” ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई। 2011 में आई उनकी पहली फिल्म “साजन चले ससुराल” से वो भोजपुरी फिल्म जगत के सितारे बन गए।

खेसारी लाल यादव ने अब तक 100 से अधिक भोजपुरी फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने कई हिट एल्बम भी जारी किए हैं। उनके कुछ लोकप्रिय गीतों में “लहंगा चोली में”, “लचके पाय लचके”, “भतार जी लेके चले”, और “सइयां जी रे” शामिल हैं।

खेसारी लाल यादव को उनके अभिनय और गायन के लिए कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें भोजपुरी फिल्मफेयर पुरस्कार, भोजपुरी स्टारडस्ट अवार्ड्स, और आईफा अवार्ड्स शामिल हैं।

खेसारी लाल यादव एक लोकप्रिय सार्वजनिक व्यक्ति हैं। उनके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं। वह अक्सर अपने नए गीतों और फिल्मों के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं।

खेसारी लाल यादव एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने कड़ी मेहनत और लगन से भोजपुरी फिल्म जगत में सफलता हासिल की है। वह एक सफल अभिनेता, गायक, और नर्तक हैं।

खेसारी लाल यादव के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  • जन्म: 15 मार्च 1986, अकबरपुर, बिहार
  • शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा
  • करियर: अभिनेता, गायक, नर्तक
  • प्रसिद्ध फिल्में: साजन चले ससुराल, देवरा बड़ा सतावेला, दुल्हन गंगा पार के, संघर्ष, मेहंदी लगा के रखना
  • प्रसिद्ध एल्बम: माल भेटाई मेला, लहंगा चोली में, लचके पाय लचके, भतार जी लेके चले, सइयां जी रे
  • पुरस्कार: भोजपुरी फिल्मफेयर पुरस्कार, भोजपुरी स्टारडस्ट अवार्ड्स, आईफा अवार्ड्स

खेसारी लाल पहले क्या करते थे

खेसारी लाल यादव ने अपने करियर की शुरुआत एक फैक्ट्री में काम करके की थी। उन्होंने दिल्ली की एक फैक्ट्री में धागे की कटाई का काम किया था। इस काम से उन्हें इतना पैसा नहीं मिलता था कि वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। इसके बाद उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए दिल्ली के संजय कॉलोनी में लिट्टी-चोखा का ठेला लगाया। इस काम में उनकी पत्नी चंदा उनकी मदद करती थी।

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